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दुर्लभ रूद्राक्ष

एक मुखी सवार रूद्राक्ष :

यह रूद्राक्ष अन्य रूद्राक्ष पर अलग से निकला रहता है। इस रूद्राक्ष को एक मुखी सवार रूद्राक्ष कहते हैं, जिस तरह से मानव के हाथ में पाच उंगलियाँ होती है उसके अलावा छठीं उगली भी निकल आती है उसी प्रकार से रूद्राक्ष को एक मुखी सवार रूद्राक्ष कहा जाता है, ये बहुत ही दुर्लभ रूद्राक्ष है।

गणेश रूद्राक्ष :

इस रूद्राक्ष में भी कुछ भाग रूद्वाक्ष से बाहर निकला रहता है तभी इसे गणेश रूद्राक्ष कहा जाता है।

सर्वमुखी रूद्राक्ष :

इस रूद्राक्ष में भी जो भाग निकला रहता है उसका आकार सर्प की तरह होता है। सभी प्रकार के रूद्राक्ष में इस रूद्राक्ष को रखने वाले को आशा से अधिक संतोष धन प्राप्त होता है और सभी कार्य सफल होते हैं।

गौरी शंकर रूद्राक्ष :

यह रूद्राक्ष प्राकृतिक रूप से वृक्ष से ही जुड़ा हुआ उत्पन्न होता है। गौरी शंकर रूद्राक्ष धारणकरने वाले व्यकित से शिव व पारवती दोनो एक साथ प्रसन्न रहते हैं। इस रूद्राक्ष का नित्य पूजन करने पर अन्न व धन और अन्त में मोक्ष भी प्राप्त करता है।

ऊँ शिव शकित रूद्राक्ष्यै नम: इस मंत्र के द्वारा जाप करने पर प्रत्येक व्यकित लाभानिवत होता है।

एक मुखी रूद्राक्ष :

इस रूद्राक्ष को सफेद धागे मंत्रों से आमंत्रित करके गले में धारण करने से कष्ट का निवारण होता है एवं धन वृद्वि भी होती है।

दो मुखी रूद्राक्ष :

दो मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में पिरोकर ऊँ अर्ध नारीश्वर देवाय नम: जाप करके धारण करने पर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

तीन मुखी रूद्राक्ष :

तीन मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में पिरोकर रविवार के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व नहा, धोकर मंत्र

ऊँ ब्राह्रा विष्णु देवाय नम: जाप करने पर तीनों देव प्रसन्न होते हैं।

चार मुखी रूद्राक्ष :

चार मुखी रूद्राक्ष गुरूवार के दिन लाल धागे में पिरोकर ऊँ ब्रह्रा देवाय नम: मंत्र से अभिमंत्रित करके धारण करने पर विधा एवं समाज में सम्मान प्राप्त होता है।

पंच मुखी रूद्राक्ष :

पंच मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में पिरोकर शिवलिंग से छुआकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जाप करने पर पापों का नाश होता है।

छ: मुखी रूद्राक्ष :

छ: मुखी रूद्राक्ष के तीन दाने लाल धागे में पिरोकर सोमवार को मात्र ऊँ कार्तिकेय नम: का जाप करके गले में धारण करने पर रक्त चाप, हृदय रोग, दमा, खासी एवं उदर (पेट) के विकार शान्त हो जाते हैं।

सात मुखी रूद्राक्ष :

ऊँ नम: शिवाय-ऊँ महालक्ष्मै नम: मंत्र जाप करके धारण करने पर नौकरी व्यापार में उन्नति एवं र्इश्वर भकित प्रबल होती है।

आठ मुखी रूद्राक्ष :

आठ मुखी रूद्राक्ष लाल धागे में पिरोकर ऊँ सदा मंगल गणेशाय नम: मंत्र जाप करने पर सभी प्रकार के विघ्न समाप्त हो जाते हैं।

नौ मुखी रूद्राक्ष :

सोमवार को नहा, धोकर माँ दुर्गा जी के चरणों में बैठकर लाल धागे में पिरोकर गले में धारण कर लेने पर सभी रोगों का नाश होता है।

दस मुखी रूद्राक्ष :

दस मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में पिरोकर गुरूवार के दिन ऊँ श्री विष्णवे नम: मंत्र जाप करने पर मानिसक रोग समाप्त हो जाते हैं एवं सन्तान और विधा की प्रापित होती है।

ग्यारह मुखी रूद्राक्ष :

ग्यारह मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे से पिरोकर सोमवार के दिन अपने र्इष्ट देव का ध्यान करके ऊँ इष्ट देवाय नम: धारण करनेपर पापों का नाश एवं श्रद्धा में वृद्धि होती है।

बारह मुखी रूद्राक्ष :

बारह मुखी रूद्राक्ष को पीले धोगे में पिरोकर सूर्योदय के समय स्नान आदि करके सूर्य की तरफ मुख करके ऊँ सूर्य देवाय नम: मंत्र का जाप करने पर सम्मान में वृद्धि होती है।

तेरह मुखी रूद्राक्ष :

तेरह मुखी रूद्राक्ष को पीले धागे में पिरोकर

ऊँ इन्द्र देवाय नम: मंत्र का जाप करने के पश्चात गले में धारण कर लेने पर व्यकित बुद्धिमान और तेजस्वी बनता है।

चौदह मुखी रूद्राक्ष :

चौदह मुखी रूद्राक्ष को लाल धागे में पिरोकर सामेवार के दिन शिव लिंग से स्पर्श कराके

ऊँ नम: शिवाय मंत्र जाप करके धारण करने वाले व्यकित को प्रतिदिन भकित व ज्ञान प्राप्त होता है एवं सभी प्रकार की खुशियाँ प्राप्त होती हैं।

किस व्यवसाय में कौन सा रूद्राक्ष

प्रशानिक अधिकारी तेरह मुखी - एक मुखी
कोषाध्यक्ष आठ मुखी-बारह मुखी
जज न्यायधीश चौदह मुखी - दो मुखी
पुलिस तथा मिलेट्री वाले आठ मुखी - चार मुखी
बैंक कर्मी ग्यारह मुखी - चार मुखी
डाक्र वैध ग्यारह मुखी
नर्स केमिस्ट-कम्पाउन्डर तीन मुखी
वकील तेरह मुखी
नेता मंत्री, विधायक सांसद चौदह मुखी - एक मुखी
अध्यापक, धर्म प्रचारक चौदह मुखी - एक मुखी
लेखक, क्लर्क, टाइपिस्ट, स्टैनो ग्यारह मुखी - आठ मुखी
सिविल इन्जीनियर्स आठ मुखी चौदह मुखी
कम्प्यूटर इंजीनियर्स साल मुखी ग्यारह मुखी
रेल-बस चालक चौदह मुखी- गौरी शंकर
व्यवसायी दुकानदार चौदह मुखी - तेरह मुखी
उधोग पति, कारखाने दार चौदह मुखी- बारह मुखी
संगीतकार, कवि चौदह मुखी - नौ मुखी
डाक्टर, सर्जन चौदह मुखी - चार मुखी
डाक्टर, फिजीशियन दस मुखी - ग्यारह मुखी
होटल स्वामी चौदह मुखी- ग्यारह मुखी
ठेकेदार चौदह, तेरह व ग्यारह मुखी

नोट :पांचमुखी रूद्राक्ष साथ में अवश्य होना चाहिए।