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लाल किताब

लाल किताब के अनुसार-शनि उपचार

शनि देव के प्रकोप से हम सभी भयभीत रहते हैं। शनि की साढ़े साती हो या ढर्इया शनि का नाम सुनते ही घबराहट सी महसूस होने लगती है। लाल किताब में शनि के प्रकोप से बचने के लिए कुछ आसान उपाय दिये गये हैं।

आम तौर पर वैदिक ज्योतिष में ग्रह कमजोर या अशुभ सिथति में होते हैं तब उनका उपाय किया जाता है।

कुण्डली में शनि जिस भाव में सिथत रहता है उसी के अनुसार उपाय किया जाता है।

कुण्डली में शनि प्रथम भाव में :-

  • जमीन पर तेल गिरायें।
  • मांगने वाले को तवा चिमटा एवं अंगीठी दे दें।
  • वट वृक्ष की जड़ में दूध डाले एवं गीली मिटटी माथे पर लगायें।

शनि दूसरे भाव में :-

  • चलते पानी में चावल प्रवाहित करें।
  • बूढ़े ब्राह्राण को गुरूवार को पीली वस्तुएँ दें।

शनि तृतीय भाव में :-

  • साँप को दूध पिलायें।
  • मंदिर में काली उड़द साबुत-काले चने दान करें।
  • चन्दन की लकड़ी दान में दें।

शनि चतुर्थ भाव में :-

  • मछली को दाना खिलायें।
  • रात्रि में दूध न पीयें।
  • काली भैंस पाले और रोज उसे खिलायें।

शनि पंचम भाव में :-

  • मंदिर में बादाम चढ़ायें उनमें से आधे घर पर ले आयें।
  • पुत्र के जन्मदिन पर मिठार्इ न बाटें।
  • काले सुरमें को जल में प्रवाहित करें।

शनि षष्ठम भाव में :-

  • भूरे अथवा काले कुत्तों को भोजन करायें।
  • सरसों का तेल शीशी में डाल कर तालाब में डाल दें।
  • सर्प को दूध पिलायें।

शनि सप्तम भाव में :-

  • शक्कर मिटटी की मटकी में भरकर शमशान में दबा दें।
  • पत्नी के बालों में सोने की तार लगायें।
  • रिश्तेदार के साथ साझे में कार्य न करें।

शनि अष्टम भाव में :-

  • शराब मास व अण्डे से परहेज करें।
  • मशीनरी का व्यवसाय न करें।
  • मकान की खरीद फरोक्त न करें।

शनि नवम भाव में :-

  • चलते पानी में चावल प्रवाहित करें।
  • ब्राह्राण को वस्त्र दान करें।
  • काले तिल बहते चल में प्रवाहित करें।

शनि दशम भाव में :-

  • रात्रि में दूध न पिये।
  • दस अन्धों को भोजन करायें।
  • नित्य मनिदर दर्शन कर लें।

शनि एकादश भाव में :-

  • जमीन पर तेल गिरायें।
  • मकान के दक्षिण का दरवाजा हटा दें।
  • शुभ कार्य के पहले मिटटी की मटकी भरकर रखें।

शनि द्वादश भाव में :-

  • झूठ बोलने से परहेज करें।
  • धर्म-कर्म करते रहें।
  • प्याऊँ खुलवायें।

नोट :-

  • एक समय में एक ही उपाय कारगर सिद्व होगा।
  • उपाय कम से कम 40 दिन तक करना चाहिए।
  • उपाय आरम्भ करने के पश्चात नागा न करें।
  • उपाय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच किया जाता है।
  • उपाय जो न करने की सिथति में हो केवल (खून का रिश्तेदार) ही कर सकता है।

लाल किताब एवं सन्तान योग

कुण्डली का पांचवा घर सन्तान भाव के रूप से माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्री इसी भाव में संतान कैसी होगी एवं माता-पिता से उनका किस प्रकार का सम्बन्ध होगा। इस भाव में सिथत ग्रहों को देखकर काफी कुछ जाना जा सकता है।

पांचवे घर में सूर्य :-

लाल किताब के नियमानुसार पांचवे घर में सूर्य का नेक प्रभाव होने से संतान जब गर्भ में आती है तभी से व्यकित को शुभ फल प्राप्त होना शुरू हो जाता है। इनकी संतान जन्म से ही भाग्यवान होती है। अपने बच्चों पर जितना खर्च करते हैं उतना ही शुभ परिणाम प्राप्त होता है और यदि सूर्य मन्द अर्थात नीच का होता है, तो पिता को अपने बच्चों से सुख नहीं मिल पाता है, वैचारिक मतभेद के कारण बच्चे माता-पिता के साथ नहीं रह पाते हैं।

पांचवे घर में चन्द्रमा :-

पांचवें घर का चन्द्रमा सन्तान का पूर्ण सुख देता है, सन्तान की शिक्षा अच्छी होती है। व्यकित भी अपने बच्चों के प्रति जागरूक रहता है। व्यकित स्वयं जितना उदार होता है, संतान भी उतनी ही उत्तम होती है। यदि चन्द्रमा नीच का होता है, तो विपरीत फल प्राप्त होता है।

पांचवे घर में मंगल :-

लाल किताब के अनुसार मंगल अगर पांचवे स्थान पर है तो संतान भी मंगल के समान ही पराक्रमी होती है। शत्रुओं का भय इन्हें नहीं सताता है और यदि मंगल नीच का हो तो व्यकित को अपनी चारपार्इ में ताँबे की कील ठोक देनी चाहिए। इस उपाय से मंगल सम्बन्धी दोष दूर हो जाता है।

पांचवे घर में बुध :-

लाल किताब के अनुसार बुध को पांचवे घर में होना इस बात का संकेत है कि संतान बुद्धिमान एवं गुणी होगी। संतान की शिक्षा दीक्षा होगी अगर व्यकित चाँदी धारण करता है तो यह संतान के लिए और भी लाभप्रद रहता है। बुध वाले व्यकित को विवाहों में नहीं पड़ना चाहिए।

पांचवे घर में गुरू:-

पांचवें घर में शुभ ग्रह गुरू होने से सन्तान व पिता अधिक भाग्यशाली हो जाता है और उसे दिनों दिन कामयाबी प्राप्त होती है। संतान भी बुद्धिमान होती है गुरू नीच होने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता।

पांचवे घर में शुक्र :-

पांचवे घर का शुक्र भी संतान के विषय में शुभ समाचारों का संकेत करता है। सन्तान का जन्म होते ही धन टपकने लगता है। व्यकित सदचरित्री हो तो संतान को भी ख्याति प्राप्त होती है। शुक्र अगर नीच का हो तो प्रभाव उल्टा होता है।

पांचवे घर में शनि :-

शनि पांचवे घर में होने से सन्तान सुख प्राप्त होता है एवं सन्तान जीवन भर मेहनत करके लगन के साथ कार्य करके ही आगे बढ़ता है।
शनि अगर नीच का होता है तो मंदिर में बादाम चढ़ाने चाहिए और कुछ बादाम प्रसाद के रूप में घर लाकर स्वयं ही खा लेना चाहिये।

पांचवे घर में राहु :-

पांचवे घर में राहु होने से सन्तान सुख विलम्ब से प्राप्त होता है, अगर राहु शुभ सिथति में हो तो पुत्र सुख की संभावना प्रबल होती है। नीच राहु संतान को कष्ट देता है। नीच राहु होने पर व्यकित को उत्सव नहीं करना चाहिए, संतान सुख राहु के कारण होने से अपनी ही स्त्री से दोबारा विवाह करना चाहिये।

पांचवे घर में केतु :-

केतु भी राहु के समान पांचवे घर में अशुभ होता है मगर केतु शुभ होने पर आकसिमक लाभ मिलना शुरू हो जाता है केतु यदि नीच का हो तो मसूर की दाल का दान कर लेना चाहिये।