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मूलांक

मूलांक ज्योतिष के प्रमुख अंकों में से एक है. मूलांक 4

मूलांक चार मूलांक ज्योतिष के प्रमुख अंकों में से एक है. मूलांक 4 को सूर्य के धनात्मक रूप अथवा राहु का परिचायक माना जाता है. भारतीय अंकशास्त्र में 4 मूलांक का अधिष्ठाता ग्रह राहु है और पाश्चात्य मतानुसार मूलांक 4 के प्रतिनिध ग्रह ''हर्षल'' अर्थात यूरेनस को माना जाता है. मूलांक 4 का संबंध सूर्य तथा मूलांक 1 से माना जाता है. मूलांक चार के जातकों के जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहते हैं और जीवन की यह परिस्थितियां अचानक ही आती हैं जिनकी इन्हें कल्पना भी नहीं होती. 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्में व्यक्तियों का मूलांक 4 होता है.

मूलांक 4 की विशेषताएं | Characteristics of Moolank-4

मूलांक चार के व्यक्ति संघर्षशील होते हैं. मूलांक 4 अपना एक अलग विचार प्रस्तुत करता है, इनकी विचारधारा आम लोगों से प्रायः अलग होती है, इस कारण इस जातक के कई मित्र, विरोधी या शत्रु हो जाते हैं. इनके व्यवहार में विरोध की प्रमुखता होती है जो जीवन के प्रत्येक मोड़ पर दिखाई देती है. इस कारण लोग इन्हें लड़ाकू व झगडा़लू भी समझ बैठते हैं

मूलांक चार के जातक समाज सुधारक, प्राचीन प्रथा के उन्मूलक तथा आधुनिक प्रथा को अपनाने वाले एवं संस्थापक होते हैं. समाज में व्याप्त रूढ़ियों को दूर करने का प्रयास करते हैं

मूलांक चार पर राहु का प्रभाव पड़ता है इस कारण चार मूलांक के लोग साहस, प्रगति, विध्वंस, विस्फोट, आश्चर्यजनक कार्य, तथा असंभावित कार्य करने वाले होते हैं.

4 मूलांक वाले सामाजिकता व राजनीति क्षेत्र में भी नवीनता लाने में विश्वास रखते हैं. चार मूलांक वाले सहजता पूर्वक या जल्द ही किसी से संबंध स्थापित अथवा मित्रता नहीं कर पाते हैं किंतु जब मित्र बना लेते हैं तो बहुत अच्छे मित्र साबित होते हैं.

इनका व्यक्तित्व रहस्यमय होता है,तथा जीवन में लाभ-हानि, उत्थान-पतन आकस्मिक होता है. इनकी मन:स्थिति का पता लगाना कठिन होता है. अपनी महत्वपूर्ण बातों को गोपनीयता के साथ संभाले रखते हैं. राहु की रहस्यात्मकता इनके चरित्र में परिलक्षित होती है.

मूलांक चार के जीवन में सहसा एवं आश्चर्यजनक प्रगति होती है, जीवन में अनेक असंभावित घटनायें भी घट सकती हैं. मूलांक 4 वाले कभी तो उच्चता के शिखर पर होते हैं और कभी यह न्यूनता को पाते हैं, इनको निरंतर कार्य में लगे रहना पड़ता है और नये-नये परिवर्तन तथा आविष्कारों से यह अपने नाम को रौशन करने का प्रयास करते हैं.

मूलांक चार में नवीनता का समावेश होता है पुरानी प्रथाओं, रीतियों के विरोधी होते हैं तथा उनमें सुधार करने का प्रयास भी करते हैं समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं. अपने कार्यों द्वारा प्राचीन प्रथाओं को नवीन रूप देने की कोशिश करते हैं.

इनके जीवन का मूल रहस्य यह है कि किसी भी परिस्थितियों की परवाह नहीं करते तथा अनुशासन और दृढ़ संकल्प द्वारा यह विपरीत परिस्थितियों से भी निकल आते हैं.

मूलांक 4 की कमियां | Demerits of Moolank-4

अपने जीवन में ये धन संग्रह अधिक नहीं कर पाते हैं, व्यय अधिक करते हैं इन जातकों को ढेर सारा रुपया मिले तो उसे अधिक सोचे समझे बगैर खर्च कर डालते हैं. अत: इन्हें अपव्यय करने पर नियंत्रण तथा धन संचय करना चाहिए.

नाम, यश अधिक प्राप्त करते हैं यदि ये अपनी संघर्ष करने की प्रवृत्ति पर अंकुश रखकर, सहनशील तथा सहिष्णु बन सकें और शत्रुता कम पैदा करें, तो अपने जीवन में अधिक सफलता अर्जित करते हैं.

मूलांक चार के जातकों को अधिक क्रोध भी आता है तथा यह तुनकमिजाज वाले होते हैं. कभी-कभी अत्यधिक श्रम एवं मानसिक थकान के कारण सिरदर्द, गर्मी से उत्पन्न रोग, मानसिक तनाव आदि का सामना करना पड़ता है.

मूलांक 4 वाले अपने स्वभाव तथा विचारधारा में बदलाव लाने का प्रयास करें और प्रतिद्वंन्द्विता तथा संघर्ष करने वाली प्रवृति का त्याग कर दें, तो हर क्षेत्र में सफल हो सकते हैं.

मूलांक चार के जातकों का पारिवारिक और दाम्पत्य जीवन कुछ क्लेशयुक्त भी रहता है. इन्हें पत्नी के स्वास्थ्य की सदैव चिंता बनी रहती है. यदि परिवार के सदस्य उनकी देखभाल करते हैं, तो भी वे अपने को हमेशा अकेला ही समझते हैं इनका अकेलापन दूर नहीं हो पाता है.

मूलांक चार वाले कई बार वे बहुत स्वार्थी भी बन जाते हैं और अपने मन को अकारण दुःख देते हैं, इस कारण हताशा में जीवन व्यतीत करते हैं और अधिक दुःखी रहते हैं.

मूलांक चार वाले बहुत ही संवेदनशील होते है .इनकी भावनाओ को शीघ्र ही ठेस पहुचती  है यह अपने आपको ये अकेला महसुस करते है  तथा  अपने आप को हताश और निराश महसूस करते है

मूलांक चार के लोग अलग ही दृष्टिकोण अपनाते हैं किसी बहस या परिचर्चा मे विरोधी रुख अपनाते है .इस कारण कभी कभी अन्य लोग इन्हें स्वार्थी एवं झगड़ालु समझ सकते है और इनके शत्रु भी बन जाते हैं परन्तु ये ऐसे होते नही है.

दूसरों के परामर्श बिना कुछ भी नही कर सकते है .इस कारण स्वंतत्र निर्णय लेना कठिन होता है. कई बार दूसरों को हानि पहुँचा कर अपना स्वार्थ भी सिद्ध कर लेते है परंतु इन्हें बाद में अपनी गलती का पश्चाताप भी होता है