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Ramcharitra Prashnavali Free

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अपने बारे में

आकाश का दृश्य देखते ही सबका मन कोतुहूल व जिज्ञासा से भर जाता है, आकश गंगा के चमचमाते ग्रह-नक्षत्र-राहु-केतू-ध्रुव एवु पुच्छल तारे एवं समप्तऋषियों सूय सदैव समय पर ही उदित होता है क्यों ? ऋतुओं का भी समय निशिचत होता है। यह सब ब्रह्रााण्ड के कौतूहल देखकर ज्योतिषियों ने भविष्य के गर्भ में झांका और उसके भेदों को जानकार सारी दुनियाँ के समक्ष प्रस्तुत किया।
आत्मा जब धरती पर अवतरित होती है तब कुछ नक्षत्र भी उदय होते हैं और कुछ अस्त-ऐसी सिथत को होरो स्कोप पर चिनिहत किया जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्योतिष के दो भाग होते हैं-

प्रथम गणितीय ज्योतिष गणना

जिसके अनुसार ग्रह-नक्षत्र की समय, स्थान आदि की गणना की जाती है।

द्वितीय फलित ज्योतिष

जिनके अनुसार ग्रह-नक्षत्रों के द्वारा भूत-भविष्य एवं वर्तमान में झाँकने का प्रयास किया जाता है।

ऋषियों-महर्षियों के विलक्षण ज्ञान से जिनकी गणनाओं के अनुसार गम्भीरता से मनन-चिन्तन करके पंडित सतीश रोचीराम शर्मा जिनका जन्म 2 जुलाई, 1959 ई सन एवं दिन शनिवार को रात्रि 8 बजकर 45 मिनट पर जिला लखनऊ में हुआ।

अपने ही पिता श्री को अपना गुरू मानकर उन्हीं से शिक्षा एवं दीक्षा प्राप्त की जिनका नाम पंडित श्री रोचीराम शर्मा जो कि ज्योतिषी एवं कर्मकांडी ब्राह्राण थे जिन्होंने संस्कृत विषय से एम0ए0 किया था।

पंडित श्री रोचीराम शर्मा जी लखनऊ क्षेत्र में घसियारी मंडी सिथत सिंधी स्कूल बाबा ठाकुरदास हायर सैकेन्डरी स्कूल में 30 वर्षों तक अध्यापन के कार्य में कार्यरत थे तत्पश्चात 3 वर्ष तक प्रधान अध्यापक रहे एवं शासन के द्वारा कार्यकाल सीमा 2 वर्ष बढ़ने पर उन्होंने प्रधानाचार्य की भूमिका का निर्वाह किया उसके पश्चात उनके अच्छे व्यवहार एवं समाज सेवा कार्य व कुशल बागडोर के कारण 1 वर्ष और बढ़ा दिया गया-अर्थात 5 वर्ष तक प्रधानाचार्य के पद पर सुचारू रूप से कार्य करते रहे।

कालेज से रिटायर होने के पश्चात भी समाज सेवा का कार्य बखूबी निभाते रहे एवं अपना ज्योतिषीय ज्ञान भी साथ-साथ बांटते रहे मगर प्रकृति को कुछ और मंजूर था। 75 वर्ष की अवस्था में उनकी आत्मा-परमात्मा में विलीन हो गयी।

अत: उन्हीं की प्रेरणा द्वारा जो शिक्षा एवं दीक्षा प्राप्त की थी उन्हीें के चरण चिन्हों पर चलकर एक सफल ज्योतिषी बनने का संकल्प धारण करके ज्योतिषीय ज्ञान गंगा को प्रचारित व प्रसारित करने की भीष्म प्रतिज्ञा कर रखी है।

इसलिए आप सब लोग भी आइये हम सब मनन एवं चिन्तन करते हैं प्रकाण्ड ज्योतिष ज्ञान का हम सब परम पिता से प्रार्थना करते हैं कि :-

सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित दु:ख भाग भवेत।।