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Ramcharitra Prashnavali Free

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आकाश का दृश्य देखते ही सबका मन कोतुहूल व जिज्ञासा से भर जाता है। आकश गंगा के चमचमाते ग्रहण् नक्षत्रण् राहुण् केतूण् ध्रुवए पुच्छल तारे एवं सप्तऋषि और सूयॅ सदैव् समय पर ही उदित होते है क्यों कि ऋतुओं का भी समय निशिचत होता है। आत्मा जब धरती पर अवतरित होती है तब कुछ नक्षत्र भी उदय होते हैं और कुछ अस्त.ऐसी सिथत को होरोस्कोप पर चिनिहत किया जाता है।

ग्रहों का प्रभाव व शांति

जीवन में मनुष्य अपने सुख के लिए भौतिक साधनों को जुटाता है ऐसे साधनों को जुटाने में इनके प्रकार की कठिनाइयाँ एवं समस्यायें उत्पन्न होती हैं तब प्राणी-देवी-देवताओं की आराधना करता है एवं कार्य सिद्ध करने के लिए दुख निवारण का उपाय खोजने का प्रयास करता है।

तब पता चलता है कि ग्रहों के अशुभ प्रभाव से जीवन में बाधायें, आर्थिक संकट, पारिवारिक संकट और कार्यक्षेत्र में भी बाधायें उत्पन्न होती हैं। अत: लोक कल्याण के लिए-दुर्गा सप्तशती एवं प्रसिद्ध मंत्रों के द्वारा ग्रहों को शान्त करने का उपाय बताया जाता है।

गठबंधन

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